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सिंहासन बत्तीसी: सोलहवीं पुतली सत्यवती

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: सोलहवीं पुतली सत्यवती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, वह इस प्रकार है— राजा विक्रमादित्य के शासनकाल में उज्जैन नगरी का यश दूर-दूर तक फैला हुआ था। उनके दरबार में अनेक विद्वान उपस्थित रहते थे और नौ श्रेष्ठ ज्ञानी उनके विशेष सलाहकार थे, जिनकी राय से ही राजा राज्य के महत्वपूर्ण निर्णय … Read more

“जब रिश्तों की आवाज़ धीमी पड़ गई”

काव्या: अधूरी मोहब्बत और बारिश की कहानी

काव्या की कहानी एक अधूरी मोहब्बत है जहाँ रिश्तों की खामोशी, परिवार की सोच और फैसलों की दूरी उसे आरव से दूर कर देती है, लेकिन यादें हमेशा जिंदा रहती हैं।

“वसीयत के उस एक पन्ने ने पूरे परिवार को दुश्मन बना दिया”

वसीयत

शुक्ला हवेली में एक वसीयत के सामने आते ही पूरे परिवार की नींव हिल जाती है। वर्षों से छिपे रिश्तों के सच, अपमान, धोखे और अधूरे दर्द धीरे-धीरे सबके सामने आने लगते हैं। अमन को पता चलता है कि जिस आदमी को वह पिता मानता रहा, वह उसका असली पिता ही नहीं है। परिवार के हर सदस्य के अंदर दबे जख्म बाहर आने लगते हैं और एक सच पूरे घर को टूटने के कगार पर ला खड़ा करता है।