सिंहासन बत्तीसी
सिंहासन बत्तीसी: सोलहवीं पुतली सत्यवती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, वह इस प्रकार है— राजा विक्रमादित्य के शासनकाल में उज्जैन
सिंहासन बत्तीसी: चौदहवीं पुतली सुनयना ने राजा भोज को यह कथा सुनाई— राजा विक्रमादित्य सभी राजाओं में श्रेष्ठ माने जाते थे। वे
सिंहासन बत्तीसी: बीसवीं पुतली – ज्ञानवती ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है- राजा विक्रमादित्य के दरबार में लोग केवल न्याय
सिंहासन बत्तीसी: अठारहवीं पुतली तारामती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, वह इस प्रकार है—राजा विक्रमादित्य गुणों के महान पारखी थे।
सिंहासन बत्तीसी: ग्यारहवीं पुतली त्रिलोचनी ने राजा भोज को यह कथा सुनाई— राजा विक्रमादित्य अपनी प्रजा से अत्यंत प्रेम करते थे। उन्हें
सिंहासन बत्तीसी : नवीं पुतली मधुमालती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, उसमें राजा विक्रमादित्य की प्रजा के लिए प्राण न्योछावर