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“सत्तरवीं मंज़िल का अकेला आदमी”

विहान

विहान ने जिंदगीभर पैसा कमाया ताकि कभी कमजोर महसूस न करे, लेकिन सफलता की ऊँचाइयों पर पहुँचकर उसे एहसास हुआ कि उसने सुकून और रिश्ते खो दिए हैं। मीरा से मिलने के बाद उसकी जिंदगी बदलने लगी और पहली बार उसने समझा कि असली अमीरी बैंक बैलेंस नहीं बल्कि अंदर की शांति होती है।

“वसीयत के उस एक पन्ने ने पूरे परिवार को दुश्मन बना दिया”

वसीयत

शुक्ला हवेली में एक वसीयत के सामने आते ही पूरे परिवार की नींव हिल जाती है। वर्षों से छिपे रिश्तों के सच, अपमान, धोखे और अधूरे दर्द धीरे-धीरे सबके सामने आने लगते हैं। अमन को पता चलता है कि जिस आदमी को वह पिता मानता रहा, वह उसका असली पिता ही नहीं है। परिवार के हर सदस्य के अंदर दबे जख्म बाहर आने लगते हैं और एक सच पूरे घर को टूटने के कगार पर ला खड़ा करता है।