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सिंहासन बत्तीसी: सोलहवीं पुतली सत्यवती

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: सोलहवीं पुतली सत्यवती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, वह इस प्रकार है— राजा विक्रमादित्य के शासनकाल में उज्जैन नगरी का यश दूर-दूर तक फैला हुआ था। उनके दरबार में अनेक विद्वान उपस्थित रहते थे और नौ श्रेष्ठ ज्ञानी उनके विशेष सलाहकार थे, जिनकी राय से ही राजा राज्य के महत्वपूर्ण निर्णय … Read more

सिंहासन बत्तीसी: चौदहवीं पुतली सुनयना

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सिंहासन बत्तीसी: चौदहवीं पुतली सुनयना ने राजा भोज को यह कथा सुनाई— राजा विक्रमादित्य सभी राजाओं में श्रेष्ठ माने जाते थे। वे जितने न्यायप्रिय, दानी और त्यागी थे, उतने ही साहसी और पराक्रमी भी। उन्हें शिकार खेलने का विशेष शौक था और वे निहत्थे भी हिंसक पशुओं का सामना कर सकते थे। एक बार उन्हें … Read more

सिंहासन बत्तीसी: बीसवीं पुतली – ज्ञानवती

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सिंहासन बत्तीसी: बीसवीं पुतली – ज्ञानवती ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है- राजा विक्रमादित्य के दरबार में लोग केवल न्याय पाने के लिए ही नहीं आते थे, बल्कि ऐसे कठिन प्रश्न भी लेकर आते थे जिनका उत्तर उन्हें कहीं और नहीं मिलता था। राजा विक्रम अपनी बुद्धिमत्ता और अनुभव से हर प्रश्न का … Read more

सिंहासन बत्तीसी: अठारहवीं पुतली तारामती

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सिंहासन बत्तीसी: अठारहवीं पुतली तारामती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, वह इस प्रकार है—राजा विक्रमादित्य गुणों के महान पारखी थे। वे विद्वानों और कलाकारों का अत्यंत सम्मान करते थे। उनके दरबार में देश-विदेश से विद्वान और कलाकार आते थे तथा अपनी योग्यता के अनुसार आदर और पुरस्कार प्राप्त करते थे। एक दिन उनके … Read more

सिंहासन बत्तीसी: ग्यारहवीं पुतली त्रिलोचनी

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सिंहासन बत्तीसी: ग्यारहवीं पुतली त्रिलोचनी ने राजा भोज को यह कथा सुनाई— राजा विक्रमादित्य अपनी प्रजा से अत्यंत प्रेम करते थे। उन्हें हर समय अपने राज्य की सुख-समृद्धि और जनता के कल्याण की चिंता बनी रहती थी। एक बार उन्होंने संपूर्ण राज्य की मंगलकामना के लिए एक भव्य महायज्ञ कराने का निर्णय लिया। इस महायज्ञ … Read more

सिंहासन बत्तीसी: नवीं पुतली मधुमालती

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सिंहासन बत्तीसी : नवीं पुतली मधुमालती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, उसमें राजा विक्रमादित्य की प्रजा के लिए प्राण न्योछावर कर देने वाली भावना का अद्भुत वर्णन था। एक बार राजा विक्रमादित्य ने अपने राज्य की सुख-समृद्धि और प्रजा के कल्याण के लिए एक विशाल यज्ञ का आयोजन करवाया। कई दिनों तक वह … Read more