“वसीयत के उस एक पन्ने ने पूरे परिवार को दुश्मन बना दिया”
शुक्ला हवेली में एक वसीयत के सामने आते ही पूरे परिवार की नींव हिल जाती है। वर्षों से छिपे रिश्तों के सच, अपमान, धोखे और अधूरे दर्द धीरे-धीरे सबके सामने आने लगते हैं। अमन को पता चलता है कि जिस आदमी को वह पिता मानता रहा, वह उसका असली पिता ही नहीं है। परिवार के हर सदस्य के अंदर दबे जख्म बाहर आने लगते हैं और एक सच पूरे घर को टूटने के कगार पर ला खड़ा करता है।