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सिंहासन बत्तीसी: सातवीं पुतली कौमुदी

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: सातवीं पुतली कौमुदी ने राजा भोज को यह कथा सुनाई— एक रात राजा विक्रमादित्य अपने शयन-कक्ष में विश्राम कर रहे थे। चारों ओर गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था। अचानक उनकी नींद किसी स्त्री के करुण क्रंदन से टूट गई। वह रोने की आवाज इतनी दर्दभरी थी कि सुनते ही उनका हृदय व्याकुल हो … Read more

सिंहासन बत्तीसी पाँचवी पुतली लीलावती

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: पाँचवीं पुतली लीलावती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, उसमें भी राजा विक्रमादित्य की अद्भुत दानशीलता और प्रजावत्सल स्वभाव की झलक मिलती है। एक दिन की बात है, राजा विक्रमादित्य अपने दरबार में बैठकर राजकाज संभाल रहे थे। तभी एक ब्राह्मण उनसे मिलने आया। राजा ने उसका सम्मानपूर्वक स्वागत किया और आने … Read more

सिंहासन बत्तीसी: तीसरी पुतली चन्द्रकला

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: तीसरी पुतली चन्द्रकला ने राजा भोज को यह कथा सुनाई— एक समय पुरुषार्थ और भाग्य के बीच इस बात को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। पुरुषार्थ का कहना था कि बिना मेहनत के संसार में कुछ भी प्राप्त नहीं किया जा सकता, जबकि भाग्य का विश्वास … Read more

सिंहासन बत्तीसी: क्यों, कहाँ, कैसे

सिंहासन बत्तीसी

प्रजावत्सल, जननायक, प्रयोगवादी और दूरदर्शी माने जाने वाले राजा विक्रमादित्य भारतीय लोककथाओं के सबसे प्रसिद्ध पात्रों में गिने जाते हैं। प्राचीन समय से ही उनके साहस, न्यायप्रियता और दानशीलता पर आधारित अनेक कथाएँ प्रचलित रही हैं। इन्हीं कथाओं की समृद्ध परंपरा में “सिंहासन बत्तीसी” का विशेष स्थान है। यह 32 कथाओं का ऐसा संग्रह है … Read more

सिंहासन बत्तीसी कहानियां

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: तीसवीं पुतली – जयलक्ष्मी सिंहासन बत्तीसी: तीसवीं पुतली जयलक्ष्मी ने राजा भोज से कहा— “हे राजन्! यदि तुममें भी राजा विक्रमादित्य जैसी तपस्या, त्याग, दानशीलता और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा है, तभी इस सिंहासन पर बैठने का साहस करना।” इसके बाद उसने यह कथा सुनाई— राजा विक्रमादित्य जितने महान सम्राट थे, उतने … Read more

बेताल पच्चीसी सर्वश्रेष्ठ वर कौन?

बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी: चम्मापुर नाम के नगर में चम्पकेश्वर नाम का राजा राज्य करता था। उसकी रानी सुलोचना थी और उनकी पुत्री त्रिभुवनसुन्दरी अत्यंत रूपवती और गुणवान थी। जब वह विवाह योग्य हुई तो राजा-रानी उसके योग्य वर को लेकर चिंतित हो गए। अनेक राजाओं ने अपने-अपने पुत्रों के चित्र भेजे, पर राजकुमारी को कोई भी … Read more