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“उस हवेली का दरवाज़ा रात 2 बजे खुद खुलता था… और अंदर से आती थी बच्चों के रोने की आवाज़!”

गाँव की हवेली में आरव

बरसात की एक डरावनी रात, उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव भैरवपुर में लौटे पत्रकार आरव को “काली हवेली” का वह रहस्य बेचैन कर देता है जिससे पूरा गाँव दशकों से डरता आया है। अमावस्या की रातों में हवेली से आती चीखें, बच्चों के रोने की आवाज़ें और अचानक गायब हो जाने वाले लोग… सब कुछ किसी अभिशाप जैसा था। जब आरव को हवेली के मालिक ठाकुर विराज सिंह और उसकी काली तांत्रिक साधना के बारे में पता चलता है, तो वह सच जानने निकल पड़ता है। लेकिन उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि उस हवेली में सिर्फ मौत नहीं… कुछ और उसका इंतज़ार कर रहा था।

भूतिया हवेली का इश्क

भूतिया हवेली का इश्क

नेहा और उसका दोस्त रोहन अपने दोस्तों के साथ एक पुरानी हवेली में घूमने जाते हैं, जहाँ रात होते ही अजीब घटनाएँ शुरू होने लगती हैं। हवेली में भटक रही राधा की आत्मा अपने अधूरे प्यार को छोड़ नहीं पाई है। जैसे-जैसे रात गहराती है, दोस्त एक-एक करके डर और रहस्यों में फँसते जाते हैं। प्यार, मौत और आत्माओं के बीच उलझी यह कहानी आख़िर तक सस्पेंस और डर बनाए रखती है।