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पंचतंत्र की प्रमुख कहानियाँ: अपरीक्षितकारक

पंचतंत्र

पाँचवा तंत्र पंचतंत्र: दक्षिण दिशा में स्थित प्रसिद्ध नगर पाटलीपुत्र में मणिभद्र नाम का एक धनी महाजन रहता था। वह अत्यंत दयालु और धर्मपरायण व्यक्ति था। वह अपना धन लोक-सेवा, दान और धर्म-कर्म में खर्च करता रहता था। धीरे-धीरे उसकी संपत्ति कम होने लगी और उसके सम्मान में भी कमी आने लगी। समाज में घटते … Read more

पंचतंत्र की प्रमुख कहानियाँ: अपरीक्षितकारक

पंचतंत्र

दो सिर वाला जुलाहा पंचतंत्र : बहुत समय पहले मन्थरक नाम का एक जुलाहा अपने परिवार के साथ एक गाँव में रहता था। वह कपड़ा बुनकर किसी प्रकार अपना और अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। एक दिन दुर्भाग्यवश उसके करघे और कपड़ा बुनने के सभी उपकरण टूट गए। उन उपकरणों को दोबारा बनाने के … Read more

पंचतंत्र की प्रमुख कहानियाँ: संधि-विग्रह

पंचतंत्र

कौवे और उल्लू के बैर की कथा पंचतंत्र: एक समय की बात है, हंस, तोता, बगुला, कोयल, चातक, कबूतर, उल्लू और अनेक पक्षियों ने मिलकर एक बड़ी सभा आयोजित की। सभी पक्षियों का मानना था कि उनके राजा वैनतेय केवल भगवान वासुदेव की भक्ति में लगे रहते हैं और पक्षियों की रक्षा तथा उनके हितों … Read more

पंचतंत्र की प्रमुख कहानी: बगुला भगत और केकड़ा

saying-central -पंचतंत्र

पंचतंत्र की मित्रभेद कथाओं का यह संग्रह बुद्धिमानी, छल, विश्वास और एकता की अनमोल सीख देता है। बगुला भगत और केकड़ा, शेर ऊँट और गीदड़, धूर्त बिल्ली का न्याय तथा टिटिहरी और समुद्र जैसी प्रसिद्ध कहानियाँ मनोरंजन के साथ गहरी नैतिक शिक्षा भी प्रदान करती हैं। ये कहानियाँ बच्चों और बड़ों दोनों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक हैं।